उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी में बाढ़ का कहर
उत्तराखंड का उत्तरकाशी जिला, जिसे देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, एक बार फिर प्राकृतिक आपदा का शिकार हुआ है। 5 अगस्त, 2025 को धराली गांव में बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने इलाके में भारी तबाही मचाई है। यह घटना एक बार फिर से हिमालयी क्षेत्र की नाजुकता और यहां हो रहे अनियंत्रित विकास पर सवाल खड़े करती है। इस आपदा ने न केवल जान-माल का भारी नुकसान किया है, बल्कि चार धाम यात्रा को भी बुरी तरह प्रभावित किया है

1. आपदा का कारण और घटनाक्रमइस विनाशकारी घटना का मुख्य कारण बादल फटना है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब किसी छोटे से भौगोलिक क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 100 मिमी से अधिक बारिश होती है, तो उसे बादल फटना कहा जाता है। उत्तरकाशी के धराली गांव के पास स्थित खीर गाड़ नदी के जलग्रहण क्षेत्र में यह घटना हुई।
- दोपहर में हुई घटना: मंगलवार दोपहर करीब 1:45 बजे खीर गाड़ (एक बरसाती नाला) का जलस्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ गया।
- मलबा और पानी का सैलाब: बादल फटने के कारण पहाड़ से भारी मात्रा में पानी और मलबा बहकर नीचे आया, जिसने धराली गांव और बाजार को अपनी चपेट में ले लिया।
- तेज रफ्तार और अचानकता: बाढ़ का सैलाब इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया।
2. जान-माल की हानि

यह आपदा एक गंभीर मानवीय त्रासदी साबित हुई है। शुरुआती रिपोर्टों के आधार पर:
- मृत्यु: कम से कम 4 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
- लापता लोग: लगभग 50 से अधिक लोगों के लापता होने की आशंका है। इसमें स्थानीय निवासियों के साथ-साथ चार धाम यात्रा पर आए तीर्थयात्री और पर्यटक भी शामिल हो सकते हैं।
- सेना के जवान लापता: हर्षिल के पास स्थित सेना का एक कैंप भी इस आपदा की चपेट में आ गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, 8 से 10 जवान लापता बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ जवान घायल भी हुए हैं।
3. संपत्ति का भारी नुकसान
धराली में आई बाढ़ ने संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
- बह गए होटल और घर: स्थानीय लोगों के अनुसार, 20 से 25 होटल और होमस्टे पूरी तरह से बह गए हैं या मलबे में दब गए हैं। इसके अलावा, धराली गांव के कई घर भी इस आपदा से तबाह हो गए हैं।
- बाजार हुआ तबाह: धराली का पूरा बाजार बाढ़ की चपेट में आ गया है, जिससे कई दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान नष्ट हो गए हैं।
- बुनियादी ढांचे को नुकसान: गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी कई जगहों पर अवरुद्ध हो गया है, जिससे चार धाम यात्रा पर भी असर पड़ा है। कई पुल और सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
- 4. राहत और बचाव कार्य
आपदा की खबर मिलते ही तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।
बहु-एजेंसी प्रयास: राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की टीमें मौके पर पहुंचीं।
सेना की त्वरित प्रतिक्रिया: हर्षिल में स्थित भारतीय सेना की टीम, जो घटनास्थल के सबसे करीब थी, आपदा के 10 मिनट के भीतर ही वहां पहुंच गई और बचाव कार्य शुरू कर दिया। सेना ने करीब 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और घायलों को चिकित्सा सहायता दी।
हेलिकॉप्टर तैयार: खराब मौसम के कारण फिलहाल हवाई बचाव कार्य में बाधा आ रही है। लेकिन भारतीय वायु सेना के चिनूक, Mi-17V5 और चीता जैसे हेलिकॉप्टर स्टैंडबाय पर हैं और मौसम साफ होते ही उड़ान भरेंगे।
सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण: ITBP के जवानों ने भी लगभग 80 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
5. आपदा के कारण और भविष्य की चुनौतियां
उत्तरकाशी की यह घटना कोई नई नहीं है। उत्तराखंड में पिछले कुछ दशकों में इस तरह की आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं।
. भूवैज्ञानिक कारक: हिमालय एक युवा और भूगर्भीय रूप से अस्थिर पर्वत श्रृंखला है, जो इसे भूस्खलन और भूकंप जैसी घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है।
. जलवायु परिवर्तन: विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून पैटर्न बदल रहा है। इससे बादल फटने और अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं।
. अनियोजित विकास: हिमालय की नाजुकता को नजरअंदाज करते हुए नदियों के किनारे और संवेदनशील ढलानों पर हो रहे अनियंत्रित निर्माण, जैसे कि होटल, सड़कें और बांध, आपदाओं के जोखिम को और बढ़ा रहे हैं।
इस आपदा ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है। हमें ऐसी नीतियों और योजनाओं की आवश्यकता है, जो हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखें और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने में मदद करें।
वर्तमान स्थिति:
मौसम विभाग ने उत्तरकाशी समेत उत्तराखंड के कई जिलों में आने वाले दिनों में और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे बचाव और राहत कार्यों में और भी बाधाएं आ सकती हैं। सरकार और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।