असम में भूकंप 2025: 5.8 तीव्रता के झटकों से हिला पूर्वोत्तर, जानें पूरी खबर

असम में भूकंप – जानें क्या हुआ और क्यों है यह चिंता का विषय

14 सितंबर 2025 कोतीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.8 मापी गई।

मुख्य तथ्य

  • भूकंप की तीव्रता: 5.8

  • केंद्र (Epicenter): असम का उदलगुरी ज़िला

  • गहराई: ज़मीन की सतह से लगभग 5 किलोमीटर नीचे – यानी बहुत उथला भूकंप

  • प्रभाव क्षेत्र: झटके गुवाहाटी, असम के कई हिस्सों, उत्तर बंगाल, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश तक महसूस किए गए।

  • जनहानि / नुकसान: अब तक किसी बड़ी जान-माल की हानि की पुष्टि नहीं हुई है।

असम क्यों है भूकंप प्रवण (Seismic Zone)?

असम भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील इलाका है क्योंकि यह क्षेत्र बड़े भूवैज्ञानिक भ्रंश (fault lines) और टेक्टॉनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित है।

कुछ ऐतिहासिक भूकंप:

  • 1950 का असम-तिब्बत भूकंप: रिक्टर पैमाने पर ~8.6-8.7, जिसने भारी तबाही मचाई और परिदृश्य तक बदल डाला।

  • 1897 का असम भूकंप: ~8.2-8.3 की तीव्रता वाला यह भूकंप पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी था।

इन घटनाओं से पता चलता है कि असम बार-बार बड़े भूकंपों का सामना करता रहा है।

संभावित असर

हालाँकि इस बार बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन ऐसे उथले भूकंप सतह पर ज्यादा तीव्र झटके दे सकते हैं। इससे—

  • दीवारों और इमारतों में दरारें

  • पुराने घरों में प्लास्टर गिरना या खिड़कियाँ टूटना

  • बिजली-पानी की सेवाओं में रुकावट

  • आफ्टरशॉक्स (बाद के झटके) का खतरा बढ़ सकता है।

प्रशासन और तैयारी

  • नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी लगातार स्थिति पर नज़र रख रहा है।

  • स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

  • मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

सीख और संदेश

  • भूकंप-रोधी निर्माण: स्कूल, अस्पताल और बड़े भवनों में सुरक्षित डिज़ाइन अपनाना ज़रूरी।

  • आपदा प्रबंधन: समय-समय पर मॉक ड्रिल और बचाव योजनाएँ।

  • जन-जागरूकता: भूकंप के समय “ड्रॉप–कवर–होल्ड” तकनीक और घबराहट से बचना।

  • वैज्ञानिक अध्ययन: भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और मॉनिटरिंग नेटवर्क को मज़बूत करना।


👉 यह भूकंप हमें याद दिलाता है कि असम और पूरा उत्तर-पूर्वी भारत भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। सतर्कता और तैयारी ही बड़े हादसों से बचा सकती है।


असम में भूकंप 2025: 5.8 तीव्रता के झटकों से हिला पूर्वोत्तर, जानें पूरी खबर

असम भूकंप 2025: 14 सितंबर को असम के उदलगुरी ज़िले में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार यह भूकंप शाम करीब 4:41 बजे महसूस किया गया। भूकंप की गहराई ज़मीन की सतह से केवल 5 किलोमीटर थी, जिसकी वजह से झटके ज्यादा तीव्र महसूस हुए।

असम भूकंप की मुख्य बातें

  • तारीख और समय: 14 सितंबर 2025, शाम 4:41 बजे

  • रिक्टर पैमाना: 5.8

  • केंद्र (Epicenter): उदलगुरी, असम

  • गहराई: 5 किमी

  • प्रभाव क्षेत्र: गुवाहाटी, असम के अन्य हिस्सों, उत्तर बंगाल, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर तक झटके महसूस किए गए।

  • नुकसान की स्थिति: फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।

असम क्यों आता है भूकंप की चपेट में?

असम और पूरा उत्तर-पूर्व भारत सिस्मिक ज़ोन V में आता है, जो देश का सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। यहाँ टेक्टॉनिक प्लेटों के लगातार खिसकने और भूगर्भीय बदलावों की वजह से अक्सर भूकंप आते रहते हैं।

इतिहास गवाह है:

  • 1950 का असम-तिब्बत भूकंप (8.6-8.7 तीव्रता) भारत का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है।

  • 1897 का असम भूकंप (8.2 तीव्रता) ने गुवाहाटी समेत कई इलाकों को तबाह कर दिया था।

भूकंप से संभावित असर

  • इमारतों की दीवारों में दरारें

  • पुराने मकानों में क्षति

  • बिजली-पानी की आपूर्ति बाधित होने की संभावना

  • आफ्टरशॉक्स (बाद के झटके) का खतरा

प्रशासन और सरकार की कार्रवाई

  • नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) लगातार आफ्टरशॉक्स पर नज़र रख रहा है।

  • स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है।

  • मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर लोगों को सुरक्षित रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

क्या करें भूकंप के समय?

  • घबराएँ नहीं और तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएँ।

  • ड्रॉप – कवर – होल्ड” तकनीक अपनाएँ।

  • लिफ्ट का उपयोग न करें, सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।

  • आफ्टरशॉक्स के दौरान कमजोर इमारतों से दूर रहें।


निष्कर्ष

असम का यह भूकंप भले ही बड़े पैमाने पर नुकसानदेह साबित नहीं हुआ हो, लेकिन इसने फिर से यह याद दिलाया है कि उत्तर-पूर्व भारत भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। सतर्कता, सुरक्षित निर्माण और जन-जागरूकता ही भविष्य में बड़े हादसों से बचा सकती है।


Earthquake in Assam – What Happened, Why It Matters

On 14 September 2025, Assam experienced a significant seismic event: a magnitude 5.8 earthquake struck the Udalguri district in the early evening, around 4:41 PM IST.

Key Details

  • Magnitude: 5.8 on the Richter scale.

  • Epicenter: Udalguri district, Assam.

  • Depth: Very shallow — about 5 km below the surface.

  • Reach: Tremors were felt in Guwahati, parts of North Bengal, as well as nearby states like Manipur and Arunachal Pradesh.

  • Damage / Human Impact: Thankfully, as of now, there are no confirmed reports of death or major stru

Context: Why Assam is Vulnerable

Assam lies in a seismically active zone because of its position relative to fault lines and tectonic plate movements. Multiple past earthquakes have caused severe destruction in the region. Here are some historical examples:

  • The 1950 Assam–Tibet earthquake (magnitude ~8.6-8.7) is one of the worst on record in the region. It caused huge loss of life and massive landscape changes.

  • The 1897 Assam earthquake (around magnitude 8.2-8.3) also devastated large areas and had widespread effects.

These earlier events show that Assam has frequently been on the front lines of tectonic stress, making planning, building codes, and emergency preparedness especially important.

Possible Impacts and Risks

Even though this recent quake didn’t cause major damage, shallow quakes (like this one) can be felt more strongly on the surface, sometimes causing:

  • Tremors strong enough to alarm residents, possibly causing panic.

  • Minor damage — cracks in walls, fallen plaster, broken windows, etc., especially in older or poorly built structures.

  • Disruption in services (electricity, water) if infrastructure is weak.

  • Aftershocks, which can sometimes be hazardous if the main quake has weakened buildings.

What Authorities Are Doing

  • Monitoring agencies (e.g. National Center for Seismology) are tracking any aftershocks.

  • Local government has issued alerts and asked people to stay prepared.

  • Public awareness is rising, especially given media coverage across the region.

Lessons & Takeaways

  • Building resilience: Use earthquake-resistant designs, especially for schools, hospitals, and infrastructure.

  • Pre-planning: Disaster management plans, drills, evacuation routes, etc., matter a lot.

  • Community awareness: Knowing what to do during tremors — stay calm, drop-cover-hold, avoid unsafe structures.

  • Scientific study: Continued investment in seismic monitoring, fault mapping, soil response studies (how ground amplifies shaking) is needed.

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