Uttar Pradesh weather”

चक्रवात Montha मूल रूप से Bay of Bengal क्षेत्र में बना था, लेकिन उसका असर उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों—विशेषकर उत्तर-पूर्वी और पूर्वी हिस्सों में देखने को मिल रहा है।

  • India Meteorological Department (IMD) ने पूर्वी यूपी के कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

  • उदाहरण के लिए, Orai में अधिकतम तापमान में लगभग 9.8 °C की गिरावट दर्ज की गई है।अगले कुछ दिनों में 50 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, बढ़ी हुई आर्द्रता और तापमान में अस्थिरता की संभावना है।

• बारिश और तापमान

पूर्वी यूपी के इलाकों में बारिश और बादल छाए रहने से तापमान नीचे गिरा है और मौसम कुछ अस्थिर बना हुआ है।

मौसम में अचानक बदलाव और बारिश के कारण

 कृषि पर प्रभावCyclone Montha tracker map: Check landfall time, where it's heading, path,  rain-hit areas, and IMD warnings - The Economic Times

 कृषि गतिविधियों पर असर दिखने लगा है। उदाहरण के लिए, खेतों में पहले बोई गई फसल (early-sown) को नुकसान हो सकता है क्योंकि लज्जड़न (lodging — जैसे कि पौधे लेटकर नीचे गिर जाना) की संभावना बढ़ गई है।

जनजीवन और तैयारी

  • प्रदेश में अधिक ध्यान पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों पर केंद्रित है, जहाँ व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है।

  • हालांकि चक्रवात का केंद्र यूपी में नहीं था, लेकिन उसके “बाकी भाग” यानी अवशेष और वायुमंडलीय प्रभाव उत्तर प्रदेश तक पहुँचे हैं—जिससे मौसम में बदलाव हुआ है।

3. चुनौतियाँ और जोखिम

  • बाढ़-प्रवण इलाकों में: जहाँ नदियाँ या नाले पास-पास हैं, वहाँ अचानक बारिश के गिरने से जलभराव का खतरा बढ़ गया है।

  • खेती पर असर: फसलें पहले से बोई जा चुकीं हैं, बारिश और हवा के कारण डंकों का क्षय, पौधे गिरने, या फसलों का खराब होना संभव है।

  • सड़क-परिवहन व जन-स्वास्थ्य: बारिश और तेज हवा से सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं; साथ ही ठंड-वृद्धि व ऊँची आर्द्रता से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

4. कार्रवाई और सुझाव

  • स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि पूर्वानुमान-सूचनाओं को सक्रिय रूप से साझा करें, खासकर उन जिलों में जहाँ चेतावनी जारी है।

  • किसान समुदाय को सलाह है कि उन्हें फसल-बारी की स्थिति का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, जैसे कि पौधे नीचे तो नहीं झुक गए, फसल को हवा/बारिश से लूम तो नहीं ला दी।

  • आम लोगों के लिए सुझाव: घर के आसपास की नालियों की सफाई रखें, बारिश के समय बिजली उपकरणों को सुरक्षित रखें, और मौसम ‎अस्थिर रहने पर बाहर निकलने से बचें।

  • यदि आप घर-बाहर प्रबंधन कर रहे हैं तो यह ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार की सूचनाएँ—जैसे IMD द्वारा भेजी गई अलर्ट—सक्रिय रूप से देखें।

5. आगे देखने वाले मुद्देCyclone Montha effect in UP: Heavy rainfall alert for Mirzapur, Varanasi  divisions | Lucknow News - The Indian Express

  • चक्रवात का प्रत्यक्ष तमगा उत्तर प्रदेश में नहीं रहा, लेकिन इसका औपचारिक प्रभाव (रिम्नेंट्स, बादल-प्रवाह, पश्चिमी विक्षोभ के संग) यूपी तक पहुँचा है।

  • अगले 2-3 दिनों में — विशेषतः 29-31 अक्टूबर के बीच — तापमान में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।

  • इस तरह के मौसम-परिवर्तन से यह सीख मिलती है कि अप्रत्याशित मौसम घटनाओं का प्रभाव जहाँ सीधे नहीं दिखता वहाँ भी परोक्ष रूप से पड़ सकता है — इसलिए तैयारी जरूरी है।

Affected / Alert-districts

  • Districts under heavy rainfall alert in the eastern part of UP (especially under the Mirzapur division & Varanasi division): The India Meteorological Department (IMD) has issued warnings for heavy rainfall in those divisions.

  • More than 50 districts in UP are expected to see light rainfall due to the system.

  • A map and weather advisory identified that UP’s eastern and southern districts would see light to moderate rainfall, gusty winds, and changes in temperature due to Montha’s influence.


🎯 Specific district examples

  • The article mentions that districts in the Mirzapur and Varanasi divisions are under heavy rainfall alert.

  • It also mentions eastern UP broadly, for example: “light to moderate rainfall … in over 50 districts of the state”.


⚠ Note & caveats

  • The reporting doesn’t list every single district by name; most tables refer to “over 50 districts” or “districts in eastern UP / southern UP” rather than full lists.

  • The impact in UP is indirect (remnants, weather system spread) rather than a direct landfall.

Cyclone Montha का असर उत्तर प्रदेश में धान (Dhan) की फसल पर सीधा और अप्रत्यक्ष दोनों रूप में पड़ रहा है। नीचे मैं विस्तार से बता रहा हूँ कि यह चक्रवात धान के खेतों पर किस तरह प्रभाव डाल सकता है 👇


🌧️ 1. बारिश और पानी भराव का प्रभाव

  • Cyclone Montha के चलते लगातार बारिश से कई जिलों—जैसे वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, जौनपुर, आजमगढ़, और चंदौली—में खेतों में पानी भरने की स्थिति बन गई है।

  • अगर खेतों में 3–4 दिन तक पानी ठहर गया तो धान की जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे फसल पीली पड़ने लगती है और उपज में 15–30% तक कमी हो सकती है।


💨 2. तेज हवा से फसल गिरना (“Lodging”)

  • तूफ़ान और हवाओं के कारण धान के पौधे झुक या गिर सकते हैं (lodging)।

  • इससे धान के बालियाँ ज़मीन से सट जाती हैं और धान के दाने सड़ने लगते हैं।

  • गिर चुकी फसल की कटाई मुश्किल होती है और मजदूरी लागत बढ़ जाती है


☁️ 3. धूप की कमी से दाने का भरण कम

  • लगातार बादल और नमी भरे मौसम में धान के दानों का भराव (grain filling) कमजोर होता है।

  • इससे दाने पतले और अधूरे बनते हैं — यानी “chalka” धान की संभावना बढ़ जाती है।


🦠 4. रोग और कीट का खतरा

  • लगातार नमी से धान की फसल में “झुलसा रोग” (Sheath blight) और “ब्लास्ट रोग” (Blast disease) तेजी से फैलते हैं।

  • इसी तरह भूरा झुलसा (Brown spot) और तना छेदक कीट भी सक्रिय हो जाते हैं।

  • ऐसे में किसान को तुरंत कवकनाशी (fungicide) जैसे Tricyclazole, Propiconazole, या Carbendazim का छिड़काव करना चाहिए (IMD और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार)।


🧑‍🌾 5. किसान के लिए सलाह

  1. खेत से अतिरिक्त पानी तुरंत निकालें ताकि जड़ों को हवा मिलती रहे।

  2. गिरी हुई फसल को सीधा करने की कोशिश करें, खासकर जहाँ पौधे अभी हरे हैं।

  3. बारिश रुकने के 2–3 दिन बाद फसल पर हल्का फफूंदनाशी छिड़काव करें।

  4. कटाई में देरी न करें — गिरी हुई फसल जल्दी काटें ताकि दाने न सड़ें।

  5. कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की सलाह लें।


📉 कुल मिलाकर संभावित नुकसान

प्रभाव का प्रकार असर
गिरा हुआ धान (lodging) 20–40% तक हानि
पानी भराव 10–25% तक उपज घट सकती है
रोग प्रकोप 5–15% तक नुकसान
कुल अनुमानित प्रभाव लगभग 15–30% औसत नुकसान (क्षेत्र अनुसार भिन्न)

👉 निष्कर्ष:
Cyclone Montha ने यूपी में धान की फसल पर विलंबित कटाई, पौधों का झुकना, और रोग-संक्रमण का खतरा बढ़ा दिया है।
हालाँकि अगर किसान समय पर पानी निकालने और रोग नियंत्रण उपाय कर लें तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

🌾 Cyclone Montha का उत्तर प्रदेश में धान की फसल पर प्रभाव

क्रमांक प्रभाव का क्षेत्र स्थिति / विवरण संभावित असर किसान के लिए सलाह
1️⃣ बारिश और पानी भराव पूर्वी यूपी (वाराणसी, मिर्जापुर, बलिया, देवरिया, आज़मगढ़, गाजीपुर आदि) में लगातार बारिश से खेतों में पानी ठहर गया जड़ों को ऑक्सीजन न मिलने से फसल पीली पड़ना, उपज में 15–30% तक गिरावट खेतों से अतिरिक्त पानी तुरंत निकालें
2️⃣ तेज हवा से पौधों का गिरना (Lodging) तूफ़ान के झोंकों से धान के पौधे झुक या गिर रहे हैं फसल कटाई में कठिनाई, बालियों का सड़ना, उत्पादन घटता है गिरी हुई फसल को सीधा करने की कोशिश करें, जल्दी कटाई करें
3️⃣ धूप की कमी लगातार बादल छाए रहने से प्रकाश संश्लेषण कम हुआ दानों का अधूरा भराव, “चालका धान” की संभावना बढ़ी मौसम साफ़ होते ही फसल को धूप लगवाएँ
4️⃣ रोग और कीट संक्रमण नमी के कारण झुलसा रोग, ब्लास्ट रोग, तना छेदक सक्रिय रोग फैलने से दानों की गुणवत्ता घटती है Propiconazole, Tricyclazole जैसे फफूंदनाशी का छिड़काव करें
5️⃣ तापमान में गिरावट तापमान में 8–10°C तक गिरावट दाने का पकना धीमा, नमी अधिक धान की कटाई में देरी न करें
6️⃣ कृषि लागत में वृद्धि गिर चुकी फसल उठाने में श्रम और लागत बढ़ेगी उत्पादन घटने और लागत बढ़ने से लाभ कम मजदूरी और कटाई की अग्रिम तैयारी रखें
7️⃣ कुल संभावित नुकसान पूर्वी और दक्षिणी यूपी में सबसे अधिक प्रभाव औसतन 15–30% तक उपज में कमी समय पर खेत प्रबंधन व मौसम की निगरानी करें

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