Air इंडियाAI171की रिपोर्ट

12 जून को Air इंडिया का विमान AI171 इसलिए दुर्घटनाग्रस्त हो गया क्योंकि पायलट ने इंजन में ईंधन की सप्लाई बंद कर दी। क्या ऐसा हो सकता है? पायलट ही दोनों इंजन के ईंधन की सप्लाई बंद कर दे। शुरू में लोगों ने संदेह व्यक्त किया। लेकिन अब

धीरे-धीरे लोग इसकी तरफ इशारा ही नहीं बल्कि पुरजोर तरीके से बात करने लगे हैं। इस जानकारी के बाद पायलट को क्लीन चिट देना मुश्किल लग रहा है कि सारा दोष उस पर मढ़कर कंपनियों को बचाया जा रहा है। नियामक संस्थाओं को बचाया जा रहा है। अगर पायलट ने ईंधन की आपूर्ति बंद की है, तो

इस सवाल को भी आप नज़रअंदाज नहीं कर सकते हैं। क्योंकि 2015 में इसी तरह की एक और घटना हो चुकी है। जर्मनी का एक विमान जर्मन विंग्स का विमान था। बार्सिलोना से डसल डड्फ के लिए आ रहा था। एक पायलट के जाते ही उसने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया और खुद विमान को क्रैश करा दिया। इस

दुर्घटना में 144 यात्री और क्रू के सभी छह सदस्य मारे गए। 150 लोग मारे गए। क्या इस तरह की घटना अहमदाबाद में दोहराई गई है? क्या इस वजह से भी भारत सरकार ने इस मामले की जांच में पुलिस को शामिल किया था? तो पुलिस की जांच कहां तक पहुंची है? पुलिस को क्या इस दिशा में कुछ हासिल हुआ

है? 12 जून को अहमदाबाद से लंदन के गेटविक एयरपोर्ट जा रहे एआई171 में 242 लोग सवार थे। एक व्यक्ति को छोड़कर 241 लोग मारे गए। इस दुर्घटना के कारण अहमदाबाद के मेडिकल हॉस्टल के छात्र भी मारे गए और आम लोग भी। इस दुर्घटना की जांच करने वाली संस्था भारत की है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से कामकरती है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो एएआईबी की आरंभिक रिपोर्ट अब सार्वजनिक कर दी गई है। मात्र 15 पन्नों की है। इसे अंतिम रिपोर्ट नहीं कह सकते क्योंकि अंतिम रिपोर्ट आने में 1 साल तक का समय लग सकता है। इस रिपोर्ट में पायलट की तरफ जब इशारा किया गया तो कई

लोगों ने यह भी कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि बड़े लोगों को बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और पायलट पर जिम्मेदारी थोपी जा रही है। विमान सेक्टर के जानकारों और पत्रकारों में इस रिपोर्ट को लेकर खलबली मच गई। मगर धीरे-धीरे लोग पायलट की जिम्मेदारी की तरफ जो इशारा किया

गया है, उसे भी गंभीरता से लेने लगे हैं। यह बात भी सही है और हो भी सकती है कि कई लोगों ने पायलट पर दोष डालने को अलग तरीके से देखा। उनका मानना है कि ऐसा कर बोइंग और जनरल इलेक्ट्रिक जैसी भीमकाय कंपनियों और भारत की नियामक संस्था डीजीसीए को बचाने का प्रयास हो सकता है। आरंभिक

रिपोर्ट में साफ-साफ नहीं कहा कि पायलट ही जिम्मेदार है। लेकिन इस तरह से इशारा किया गया है जिससे लगता है कि उसी के कारण विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। इस रिपोर्ट में लिखा है कि ईंधन की सप्लाई बंद कर दी गई। विमान अपनी रफ्तार पकड़ चुका था। तब दोनों इंजन में ईंधन की सप्लाई बंद कर दी

गई। जिससे वह नीचे आने लगा। रिपोर्ट में लिखा है कि कॉकपिट के वॉइस रिकॉर्डर से पता चलता है कि एक पायलट दूसरे पायलट से कह रहा है कि आपने बंद कर दिया, कट ऑफ कर दिया। तो दूसरा पायलट कह रहा है उसने कट ऑफ नहीं किया, बंद नहीं किया। दूसरा पायलट कह तो रहा है कि ईंधन की सप्लाई मैंने बंद

नहीं की तब उसकी तरफ क्यों इशारा किया जा रहा है? कोई भी पायलट ऐसा क्यों करेगा? उसे पता है ईंधन की सप्लाई बंद कर देने से विमान क्रैश हो जाएगा। तब आप उस रिपोर्ट में यह भी कह रहे हैं कि कोई साजिश नहीं लगती है। जब पायलट यह कह रहा है कि उसने ईंधन की सप्लाई बंद नहीं की तो उसके जवाब

को महत्व नहीं दिया जा रहा है। लेकिन सवाल को महत्व दिया जा रहा है कि एक पायलट ने पूछा ईंधन की सप्लाई कट ऑफ कर दी क्या? हमने 2015 की जर्मनी की एक विमान दुर्घटना का उदाहरण दिया कि पायलट ने ही विमान को क्रैश करार दिया और 150 लोग मारे गए। आखिर क्या हुआ होगा एआई171 में? पायलट ने ऐसा क्यों किया? अब यह सवाल

सबको परेशान करने वाला है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमें इतनी जल्दी से उसी तरफ शिफ्ट हो जाना चाहिए। पोखरा और जर्मनी का उदाहरण देकर मान लेना चाहिए कि पायलट ही जिम्मेदार रहा होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन में मिलावट की बात नजर नहीं आई और सप्लाई में खराबी नहीं थी।

लेकिन पायलट यह काम गलती से भी क्यों करेगा? नहीं कर सकता है क्योंकि उनकी ट्रेनिंग काफी सख्त होती है। कई 100 घंटों की होती है। ईंधन की सप्लाई कोई पायलट क्यों बंद करेगा? क्या इस तर्क पर इस तर्क से हम उस निष्कर्ष पर इसलिए पहुंच रहे हैं क्योंकि पोखरा और जर्मनी में ऐसी घटना हो

चुकी है। इसलिए हमारा कहना है कि इस सवाल को भी सामने रखना चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि 10 लाख करोड़ की कंपनी बोइंग की ताकत के आगे भारत की जांच एजेंसी झुक जाए। सवाल केवल विमान कंपनी को लेकर तो नहीं था। सवाल विमान के रखरखाव में खराबी को लेकर भी था। एयरपोर्ट के प्रबंधन को लेकर

भी था और सुरक्षा मानकों के नियमन को भी लेकर था। जिसका काम डीजीसीए को दिया गया है। विमानन सेक्टर के जानकार जॉन ऑस्ट्रोवर air count.com में लिख रहे हैं कि इंजन में ईंधन की सप्लाई को लेकर क्या हुआ? इसके कारणों को ठीक से जानने में महीनों लग जाएंगे। इस तरह की आरंभिक

रिपोर्ट में किसी विश्लेषण का हिस्सा नहीं होता है। जांच के समय जो बात सामने आई है अभी उसके बारे में ही लिखा जाता है। जब लंबे समय तक एनालिसिस चलती है तब इसमें काफी कुछ बदल जाता है। यह उस पत्रकार ने लिखा है जिसने सबसे पहले दुनिया में सबसे पहले एएआईबी की रिपोर्ट के बारे में

सूत्रों के हवाले से छाप दिया था। अहमदाबाद में जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है उस श्रेणी के हजार से भी ज्यादा विमान इस वक्त दुनिया में उड़ रहे हैं। 10 12 साल के इतिहास में पहली बार ड्रीम लाइनर क्रैश हुआ। इस वजह से भी विमानन सेक्टर के दुनिया भर के जानकारों की इसमें दिलचस्पी

हो गई। दुनिया का सबसे सुरक्षित विमान माना जाता है। आखिर ऐसा क्यों हुआ? इसलिए आरंभिक रिपोर्ट में जब पायलट की गलती की तरफ इशारा किया गया तो सवाल यह भी उठने लगा कि कहीं ताकतवर कंपनियों के आगे जांच करने वाली संस्था दबाव में तो नहीं आ गई। ड्रीम लाइनर विमान बोइंग बनाती है और इसके

लिए इंजन बनाने का काम जनरल इलेक्ट्रिक का है। दोनों ही अमेरिका की कंपनी हैं। यह समझना जरूरी है कि यह आरंभिक रिपोर्ट है जो 1 महीने के भीतर आती ही है। पूरी रिपोर्ट 1 साल के बाद आएगी। लेकिन उसके पहले ही इसकी जानकारी सूत्रों के हवाले से लीक की जाने लगी। 12 जुलाई को रिपोर्ट

सार्वजनिक होती है। 11 जुलाई को यह रिपोर्ट वॉल स्ट्रीट जर्नल में छप जाती है और उससे पहले किसी और वेबसाइट पर खबरों के लीक होने से संदेह हुआ कि कहीं पायलट को जिम्मेदार बताने की दिशा में इशारा तो नहीं किया जा रहा है। एएआईबी की रिपोर्ट में लिखा है कि उड़ान भरते समय विमान का वजन 213401

किलो था जो कि तय सीमा से कम ही था। जहाज में कुछ भी खतरनाक चीज नहीं थी। विमान ने उड़ान भरने की प्रक्रियाओं का पालन किया और उड़ान भरने तक कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। सब कुछ ठीक था लेकिन इंजन n1 n2 में उड़ान के वक्त जितना ईंधन होना चाहिए था उससे कम उसकी सप्लाई कम होने लगी। इंजन

में सप्लाई कट ऑफ कर दी गई। तब कॉकपिट के वॉइस रिकॉर्डर में सुना जाता है कि एक पायलट दूसरे से पूछ रहा है ईंधन की सप्लाई क्यों कट ऑफ कर दी? दूसरे पायलट ने कहा उसने बंद नहीं की। रिपोर्ट में जितनी बातें लिखी गई हैं उससे यही लगता है कि विमान में कोई गड़बड़ी नहीं थी। किसी तरह

की खराबी की तरफ इशारा नहीं किया गया है। तो क्या ऐसा हो सकता है कि इंजन फेल कर गया हो? ड्रीम लाइनर में दो इंजन होते हैं। एक इंजन फेल भी कर जाए तब भी दूसरे इंजन के सहारे इस विमान को 25,000 फीट तक की ऊंचाई तक ले जाया जा सकता है। मगर अहमदाबाद के केस में ऐसा नहीं हो सका।

विमान ऊपर जा ही नहीं सका और गिर गया। इस रिपोर्ट ने अहमदाबाद क्रैश को लेकर संदेहों को और गहरा कर दिया। 2023 की जनवरी में नेपाल के पोखरा में यति एयरलाइंस का एक विमान क्रैश हुआ था। इसमें भी पाया गया कि इंजन में ईंधन की सप्लाई बंद हो गई थी। अहमदाबाद विमान दुर्घटना की

आरंभिक रिपोर्ट को लेकर पोखरा की इस घटना को और जर्मनी की घटना को जोड़कर देखा जा रहा है। ईंधन की सप्लाई बंद करना मामूली बात नहीं है। वैसे जब ये अंतिम रिपोर्ट नहीं है तो क्या हमें निष्कर्ष निकाल लेना चाहिए? ऐसा करने से बचना चाहिए। कहीं ऐसा ना हो कि जल्दबाजी में आप दो अनुभवी

पायलटों पर इतनी बड़ी घटना की जिम्मेदारी डाल दें। उनके साथ ऐसा करना अन्याय होगा। कैप्टन सुमित सबरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर के पास पर्याप्त अनुभव था। दोनों के पास कुल मिलाकर 9000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव था। इतने अनुभवी पायलट यही काम करेंगे कि दो-दो इंजन में

ईंधन की सप्लाई बंद कर देंगे ताकि प्लेन क्रैश कर जाए। इसी वजह से लोगों को यकीन नहीं हो रहा। इसका तो यही मतलब हुआ कि पायलट ने हाराकिरी की या इसे मानवीय चूक की तरह देखा जाना चाहिए कि गलती हो गई होगी। लेकिन आज तक किसी पायलट ने ऐसी गलती नहीं की। तो क्या हो गया होगा? क्या कोई

साजिश हो सकती है? और कारण हो सकता है क्या जिसका संबंध विमान के भीतर से ना हो बाहर से हो। क्या पुलिस को इस तरह की कोई जानकारी मिली है? आरंभिक रिपोर्ट में साजिश की बात से इंकार किया गया है। यह भी कहा गया है कि उड़ान के मार्ग में चिड़ियों की कोई खास गतिविधियां नहीं देखी

गई हैं। एएआईबी की आरंभिक रिपोर्ट के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि विमान में प्रवेश करते समय पायलट से लेकर सभी क्रू मेंबर ठीक लग रहे हैं। कहने का मतलब है विमान जब उड़ा तब पायलट थका हुआ नजर नहीं आया ना नींद में रहा होगा कि ईंधन की सप्लाई बंद कर दे। नींद की बात हमने क्यों की?

2010 में लैंडिंग के वक्त दुबई से आ रहा एयर इंडिया का एक विमान बेंगलोर में फिसल कर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उस दुर्घटना में 166 यात्रियों में से 158 यात्री मारे गए। तब भी जांच रिपोर्ट में पायलट को जिम्मेदार ठहराया गया। कहा गया कि विमान जब लैंडिंग कर रहा था तब पायलट नींद के

झोंके में था। कप्तान ने सहपायलट की बात नहीं मानी। सन 2000 में पटना में इंडियन एयरलाइंस का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उसकी रिपोर्ट में भी पायलट पर दोष डाल दिया गया। उस दुर्घटना में भी बोइंग कंपनी का विमान था। 58 में से 55 लोग मारे गए। कह दिया गया कि पायलट और सहपायलट में

तालमेल ठीक नहीं थी। हम फिर से बता दें कि इसकी जांच भारत में विमान दुर्घटना की जांच करने वाली एजेंसी एएआईबी ने की है। हर देश में ऐसी संस्था होती है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने से एक दिन पहले इसे लीक किया गया। इसे लेकर और संदेह उठा ऐसा क्यों हो रहा है? अमेरिका के अखबार वॉलस्ट्रीट जर्नल में यह खबर सबसे पहले

क्यों छप रही है? वैसे सबसे पहले इस पत्रकार ने Air इंडिया के विमानन की जांच रिपोर्ट की खबर देने का दावा किया है। जॉन ऑस्ट्रोवर ने लिखा है कि वॉलस्ट्रीट जर्नल का दावा गलत है कि यह खबर किसी के पास नहीं है। केवल उसी के पास है एक्सक्लूसिव है। मैंने भी इस अखबार में काम किया है।

मगर उसका दावा सही नहीं। जॉन पहले वॉलstट जर्नल में काम कर चुके हैं। उन्होंने अपनी वेबसाइट द air c.com पर छपी खबर का प्रमाण देते हुए कहा कि यह खबर वॉलस्टेट जर्नल से पहले दुनिया भर में उन्होंने ब्रेक की। भारत में 10-15 दिन ही इसकी रिपोर्टिंग हुई और उसके बाद धीरे-धीरे खबरें गायब

होती गई। यहां हम आपको बताना चाहते हैं कि अमेरिका में जब बोइंग कंपनी के एक विमान का दरवाजा बीच हवा में खुल गया तो उसे लेकर महीनों रिपोर्टिंग होती रही। चर्चा चलती रही। पत्रकारों ने बोइंग कंपनी की एक-एक बात को खंगाल डाला था। 2023-24 के दौरान आप अमेरिकी अखबारों को पलट कर

देखिए। विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग की खस्ता हालत पर कितनी रिपोर्ट मिल जाएगी। एक से एक एक्सपर्ट ने कंपनी की क्षमता, इंजीनियरिंग सब पर सवाल उठाए। 2024 में अलास्का एयरलाइंस की फ्लाइट का मिड केबिन दरवाजा हवा में ही खुल गया। 16,000 फीट की ऊंचाई पर विमान का दरवाजा खुल जाए छोटी

बात नहीं थी। यात्री तो बच गए। उसके बाद अमेरिकी प्रेस ने सवालों और लगातार कवरेज की झड़ी लगा दी। अमेरिका के प्रेस ने कई तरह की खामियों को रिपोर्ट किया। बेल्ट ढीले हैं। कहीं बताया प्रशिक्षण सही नहीं है। निरीक्षण ठीक से नहीं होता। जहाज कैसे बन रहा है? क्वालिटी चेक करने का सिस्टम

ठीक है या नहीं? नियामक संस्थाएं अपना काम कैसे कर रही हैं? हर बात को उलट-पलट कर देखा गया। अमेरिका की संस्था फेडरल एिएशन एडमिनिस्ट्रेशन एफएए ने सभी बोइंग 7379 मैक्स विमानों को अस्थाई रूप से ग्राउंड कर दिया और जांच शुरू कर दी। यही नहीं बोइंग के सीईओ डेविड कैलहॉन को अमेरिका के

सेनेट में हाजिर होकर सवालों के जवाब देने पड़े। सब कुछ सार्वजनिक रूप से किया गया। लोगों ने देखा मगर विश्व गुरु भारत के यहां सब कुछ गुप्त रूप से चलता रहा है। सूत्रों के हवाले से खबरें लीक की जाती रही हैं। आप सेनेट की सुनवाई देखिए। सेनेटर कितने सवाल कर रहे हैं? सुरक्षा को

लेकर उल्लंघन हुआ है। इसकी जिम्मेदारी कॉरपोरेट की है। इसे लेकर सवाल पूछे गए हैं और हमारे यहां कॉर्पोरेट को भगवान मानकर उसे बचाने लग जाते हैं। किसी को फर्क नहीं पड़ता कि 241 यात्री मर गए और उसके कारण कितने ही भावी डॉक्टर मर गए। एयर फ्लाइट 610 32 आई वुड लाइक टू अपोलजाइज

बीच हवा में विमान का दरवाजा खुल गया। कोई मरा भी नहीं। पूरा अमेरिका तब भी हिल गया और यहां आए दिन लैंडिंग को लेकर इमरजेंसी लैंडिंग की खबर छप कर रह जाती है। उसकी सूचना तो आती है। लेकिन यह क्यों हो रहा है? विमानों की सुरक्षा को लेकर जो संस्थाएं बनाई गई हैं, प्रक्रियाएं बनाई

गई हैं, वो काम कर रही हैं या नहीं, इसकी कोई गहन पड़ताल नहीं होती। अलास्का एयरलाइंस का विमान कुछ और था। अहमदाबाद में जो क्रैश किया वो ड्रीम लाइनर था। 1000 से अधिक ड्रीम लाइनर उड़ान भर रहे हैं। पहली बार क्रैश हुआ। क्या भारत में उतनी सघनता और तीव्रता से रिपोर्टिंग हो

रही है? हमारा यह भी सवाल है। जो पायलट अब इस दुनिया में नहीं है, वह इस दुर्घटना का जिम्मेदार बता दिया गया है। उन पर दोष डालना आसान हो सकता है। विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। रखरखाव खराब नहीं था। नियामक संस्था का सारा काम ठीक था। इंजन फेल नहीं हुआ होगा। बस पायलट ने

दो-दो इंजन में ईंधन की सप्लाई बंद कर दी। इस देश में कौन सी ऐसी संस्था बच गई है जिसके पेशवर होने और निर्भीक होने पर यकीन हो। है कोई संस्था यहां? जांच हो रही है भारत में। खबर लीक होती है अमेरिका में। इस संबंध में भारत के नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल का बयान काफी अहम

दो-दो इंजन में ईंधन की सप्लाई बंद कर दी। इस देश में कौन सी ऐसी संस्था बच गई है जिसके पेशवर होने और निर्भीक होने पर यकीन हो। है कोई संस्था यहां? जांच हो रही है भारत में। खबर लीक होती है अमेरिका में। इस संबंध में भारत के नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल का बयान काफी अहम

करता है। अब हमारा सवाल मंत्री जी से है कि अगर इस वक्त निष्कर्ष ना निकाला जाए तो बताइए कि फिर इस रिपोर्ट में क्यों कहा गया है कि एयरक्राफ्ट के साथ सब कुछ ठीक था। क्यों कहा गया है कि ईंधन की सप्लाई भी ठीक थी, मौसम भी ठीक था। क्यों बोइंग और जनरल इलेक्ट्रिक के लिए कोई सुरक्षा के

सुझाव नहीं दिए गए हैं? किस पायलट ने पूछा और किसने जवाब दिया? नाम क्यों नहीं दिया गया है? पायलट का नाम क्यों नहीं दिया गया इस रिपोर्ट में? क्या सरकार को नाम नहीं मालूम था? सरकार के पास शुरुआती स्तर पर क्या जानकारी थी कि पुलिस को जांच में शामिल किया गया और पुलिस की जांच इस वक्त

तक कहां पहुंची है? मंत्री जी कहते हैं एएआईबी एक स्वायत्त संस्था है। उनका मंत्रालय इसके काम में हस्तक्षेप नहीं करता। भारत में स्वायत्त संस्थाओं का हाल आप जानते हैं। आपको चुनाव आयोग और बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण के दावों और सच्चाई से पता चल जाना चाहिए

चुनाव आयोग से बड़ी और ताकतवर स्वायत्त संस्था कौन है इस देश में? फॉर्म भरने और बटने को लेकर चुनाव आयोग के दावों और जमीन से आने वाली खबरों में ही कितना अंतर है? जमीन और आसमान का अंतर है। चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्था का यह हाल है भारत में। लेकिन आपसे कहा जा रहा है कि आप यकीन

कर लें कि विमान दुर्घटनाओं की जांच करने वाली संस्था एएआईबी स्वायत्त है। आप भी यानी आप दर्शक भी अब कहां स्वायत्त रह गए हैं।

Leave a Comment