“Ganesh Chaturthi 2025: जानें गणेश चतुर्थी का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, इतिहास और इस त्योहार से जुड़ी परंपराएं। विघ्नहर्ता गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के आसान उपाय और खास जानकारी।”

1  . गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन के सभी दुख-दर्द और विघ्न दूर होते हैं तथा घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और ज्ञान का देवता माना जाता है। इसलिए छात्र, व्यापारी और नए कार्य शुरू करने वाले लोग विशेष रूप से इस दिन गणेश जी की आराधना करते हैं।

गणेश चतुर्थी का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक भी है। यह पर्व लोगों को एकजुट करता है, समाज में उत्साह और सद्भाव फैलाता है। महाराष्ट्र और भारत के कई हिस्सों में यह उत्सव बड़े धूमधाम से 10 दिनों तक मनाया जाता है, जो अनंत चतुर्दशी तक चलता है।


👉 संक्षेप में महत्व:

विघ्नों का नाश और कार्यों की सफलता

बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति

समाज और परिवार में एकता का संदेश

  • गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesh Chaturthi Puja Vidhi)

    1. स्नान और शुद्धि

      • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर की सफाई करें।

      • पूजा स्थान को गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें।

    2. गणपति प्रतिमा की स्थापना

      • स्वच्छ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।

      • उस पर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

      • प्रतिमा की स्थापना उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में करना शुभ माना जाता है।

    3. संकल्प और आह्वान

      • कलश स्थापित करें और उसमें गंगाजल, सुपारी, आम्रपल्लव रखें।

      • दीपक जलाकर भगवान गणेश का आह्वान करें और संकल्प लें।

    4. गणपति पूजन

      • गणेश जी को अक्षत, रोली, चंदन, दुर्वा (21 पत्तियाँ), फूल, धूप-दीप अर्पित करें।

      • गणेश जी को मोदक, लड्डू, नारियल और फल चढ़ाएँ।

      • गणेश मंत्र और आरती करें – “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    5. आरती और प्रसाद वितरण

      • अंत में आरती करें और परिवारजनों को प्रसाद बांटें।

      • गणपति बप्पा से जीवन में सुख-समृद्धि और विघ्नों की निवृत्ति का आशीर्वाद माँगें।


    👉 पूजा के विशेष नियम:

    • गणेश जी को तुलसी पत्र अर्पित न करें।

    • प्रतिमा स्थापना से लेकर विसर्जन तक प्रतिदिन पूजा और आरती करनी चाहिए।

    • गणेश जी को लाल फूल और मोदक विशेष प्रिय हैं।

    • गणेश चतुर्थी 2025 – शुभ मुहूर्त विवरण

      • चतुर्थी तिथि (Chaturthi  time)
        – आरंभ: 26 अगस्त 2025, दोपहर 1:54 (PM)
        – समाप्ति: 27 अगस्त 2025, दोपहर 3:44 (PM)

      • मध्याह्न पूजा का प्रमुख मुहूर्त (Madhyahna Ganpati Puja Muhurat)
        – लगभग 11:05 AM से 1:40 PM तक

      • विकल्पित 36 मिनट का ‘सबसे शुभ मुहूर्त’
        – कुछ पंडितों के अनुसार, सुबह 11:05 AM से 11:41 AM या 12:22 PM तक का समय सबसे उत्तम माना जाता है

      • चंद्र दर्शन (Moon sighting) से बचें
        – 26 अगस्त: दोपहर 1:54 PM से रात 8:29 PM तक
        – 27 अगस्त: सुबह 9:28 AM से रात 8:57 PM तक

      • शहरवार (City-wise) समय जानकारी (उदाहरण)

        शहर शुभ मुहूर्त
        नई दिल्ली 11:05 AM – 1:40 PM
        मुंबई 11:24 AM – 1:55 PM
        बेंगलौरु 11:07 AM – 1:36 PM
        पुणे 11:21 AM – 1:51 PM

        गणेश चतुर्थी का इतिहास

        गणेश चतुर्थी, जिसे Vinayaka Chaturthi भी कहा जाता है, भगवान गणेश जी के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान गणेश को मिट्टी से बनाया और उन्हें प्राण प्रतिष्ठा दी। माता के आदेश पर गणेश जी ने शिवजी को अंदर जाने से रोका, जिससे रुष्ट होकर शिवजी ने उनका सिर काट दिया। बाद में देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का मस्तक प्रदान किया और उन्हें “विघ्नहर्ता” तथा “सर्वप्रथम पूज्य” होने का आशीर्वाद दिया। तभी से हर शुभ कार्य में गणेश पूजन की परंपरा शुरू हुई।

        प्राचीन समय

        • गणेश चतुर्थी का उल्लेख प्राचीन पुराणों में भी मिलता है, खासकर स्कंद पुराण और गणेश पुराण में।

        • यह पर्व आरंभ में घर-घर में साधारण रूप से मनाया जाता था।

        मध्यकाल

        • मध्यकाल में गणेश चतुर्थी सीमित रूप से मंदिरों और घरों तक ही सीमित रही।

        आधुनिक इतिहास – लोकमान्य तिलक और स्वतंत्रता आंदोलन

        • गणेश चतुर्थी को सामाजिक और सार्वजनिक रूप देने का श्रेय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को जाता है।

        • 1893 में उन्होंने इस पर्व को सार्वजनिक उत्सव के रूप में मनाना शुरू किया।

        • अंग्रेज़ों के शासनकाल में जब बड़े सामाजिक-राजनीतिक जमावड़े पर रोक थी, तब तिलक ने गणेश उत्सव को राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता आंदोलन का माध्यम बनाया।

        • इससे समाज में एकजुटता आई और अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ जनजागरण को बल मिला।

        वर्तमान समय

        आज गणेश चतुर्थी न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदायों द्वारा भी बड़े उत्साह से मनाई जाती है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गोवा में यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है, जिसका समापन अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ होता है।


        👉 संक्षेप में इतिहास का महत्व:

        • भगवान गणेश के जन्म की कथा से जुड़ा धार्मिक आधार।

        • लोकमान्य तिलक द्वारा सार्वजनिक उत्सव के रूप में शुरू की गई परंपरा।

        • राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक।

        • गणेश चतुर्थी से जुड़ी परंपराएँ

          1. गणपति प्रतिमा की स्थापना

            • इस दिन घरों और पंडालों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

            • प्रतिमा की स्थापना उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में करना शुभ माना जाता है।

          2. मोडक और लड्डू का भोग

            • भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय हैं।

            • हर दिन उन्हें मोदक, लड्डू, नारियल और फल का भोग लगाया जाता है।

          3. दुर्वा और लाल फूल अर्पण

            • गणेश जी को 21 दुर्वा (घास) और लाल फूल अर्पित करना शुभ होता है।

            • तुलसी पत्र गणेश जी को नहीं चढ़ाया जाता।

          4. दैनिक पूजा और आरती

            • प्रतिमा स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह-शाम गणपति की आरती, मंत्र-जाप और भजन होते हैं।

            • घर-घर में “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे गूँजते हैं।

          5. सामूहिक उत्सव और झाँकियाँ

            • लोकमान्य तिलक की परंपरा के बाद से पंडालों में भव्य गणेश प्रतिमाएँ सजाई जाती हैं।

            • सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य, संगीत और झाँकियाँ निकाली जाती हैं।

          6. गणेश विसर्जन

            • 1.5, 3, 5, 7 या 10 दिनों तक गणेश जी की पूजा के बाद अनंत चतुर्दशी को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।

            • विसर्जन जल में डुबकी के साथ “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के नारों से होता है।

          7. सामाजिक और धार्मिक संदेश

            • यह त्योहार लोगों को एकजुट करता है।

            • साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा हेतु अब पर्यावरण-मैत्री प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा भी बढ़ रही है।                                                                        गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के उपाय

              1. ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप

                • रोज़ाना इस मंत्र का 108 बार जाप करने से बुद्धि, विवेक और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

              2. मोदक और लड्डू का भोग

                • गणेश जी को मोदक और लड्डू विशेष प्रिय हैं।

                • सोमवार, बुधवार या गणेश चतुर्थी पर उनका भोग लगाने से गणपति जल्दी प्रसन्न होते हैं।

              3. दुर्वा और लाल फूल अर्पित करें

                • प्रतिदिन या बुधवार को गणेश जी को 21 दुर्वा की पत्तियाँ चढ़ाएँ।

                • लाल फूल और सिंदूर अर्पण करने से धन और सौभाग्य मिलता है।

              4. गणेश आरती करें

                • सुबह-शाम दीपक जलाकर “जय गणेश देवा” जैसी आरतियाँ गाना शुभ होता है।

                • घर का वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है।

              5. बुधवार का व्रत रखें

                • बुधवार को गणपति का व्रत करने और हरे रंग के वस्त्र पहनने से विघ्न दूर होते हैं।

              6. गणेश जी को दूज और चतुर्थी पर विशेष पूजन

                • गणेश चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी के दिन उपवास और पूजन करना अत्यंत फलदायी है।

              7. गणपति को पहला नैवेद्य

                • हर शुभ कार्य, पूजा या प्रसाद में सबसे पहले गणपति को अर्पित करें।

                • इससे सभी कार्य सफल माने जाते हैं।


              अतिरिक्त जानकारी (Special Information)

              • गणेश जी को तुलसी पत्र अर्पित नहीं करना चाहिए।

              • गणेश जी की पूजा में दक्षिणमुखी प्रतिमा का इस्तेमाल न करें।

              • हर शुभ कार्य की शुरुआत “श्री गणेशाय नमः” से करना मंगलकारी माना गया है।

              • गणपति की पूजा से विद्या, व्यापार, विवाह और परिवार से जुड़ी बाधाएँ दूर होती हैं।

 

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