Godhana Puja 2025: गोधना पूजा का महत्व, विधि और कथा

 

Godhana Puja 2025: गोधना पूजा का महत्व, विधि और कथा

भारत की संस्कृति में हर पर्व और परंपरा का अपना अलग ही महत्व है। इन्हीं में से एक है गोधना पूजा (Godhana Puja) — एक ऐसी पूजा जो न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र मानी जाती है बल्कि इसमें लोक परंपरा, आस्था और आत्मशुद्धि का संदेश भी छिपा है।


🕉️ गोधना पूजा क्या है?

गोधना पूजा एक पारंपरिक पूजा है जिसमें स्त्रियाँ और पुरुष अपने शरीर पर गोदना (टैटू) बनवाते हैं, जो एक धार्मिक प्रतीक माना जाता है। इस पूजा का संबंध विशेष रूप से ग्रामीण भारत, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों से जुड़ा है।
गोदना न केवल सजावट का एक माध्यम है, बल्कि यह आस्था, संरक्षण और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।


🌸 गोधना पूजा की पौराणिक कथा

किंवदंती के अनुसार, प्राचीन समय में देवी-देवता भी गोदना धारण करते थे ताकि उन्हें पहचानने में आसानी हो। एक कथा के अनुसार, जब यमराज किसी व्यक्ति की आत्मा को लेने आते थे, तो जिनके शरीर पर गोदना होता था, उन्हें दिव्य लोक में प्रवेश का आशीर्वाद प्राप्त होता था।
इस कारण लोग मानते हैं कि गोदना पूजा से शरीर और आत्मा दोनों पवित्र होते हैं।


🪔 गोधना पूजा की विधि

  1. स्नान और शुद्धिकरण:
    प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. स्थान की तैयारी:
    मिट्टी या गोबर से पूजा स्थल को लीपकर पवित्र बनाया जाता है।

  3. दीपक जलाना:
    मिट्टी के दीपक में घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

  4. देवी-देवताओं की पूजा:
    भगवान शिव, माता पार्वती और धरती माता की पूजा करें।

  5. गोदना संस्कार:
    पारंपरिक कलाकार द्वारा शरीर पर गोदना बनाया जाता है — यह आकृति देवी-देवताओं, फूल-पत्तियों या धार्मिक चिन्हों की होती है।

  6. भोजन और प्रसाद:
    पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।


🙏 गोधना पूजा का महत्व

  • आस्था और सुरक्षा का प्रतीक: गोदना को बुरी नज़र और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा देने वाला माना जाता है।

  • सांस्कृतिक पहचान: यह लोक संस्कृति और परंपरा की निशानी है।

  • आध्यात्मिक शुद्धता: माना जाता है कि गोदना से आत्मा को शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • महिलाओं के लिए शुभ: महिलाएं इसे सौभाग्य और अखंड सौभाग्य के प्रतीक के रूप में करती हैं।


🌼 गोधना पूजा कब की जाती है?

गोधना पूजा आमतौर पर श्रावण माह, भाद्रपद या सावन सोमवारी के समय की जाती है।
कुछ क्षेत्रों में यह पूजा नाग पंचमी या हरियाली तीज के आस-पास भी होती है।


💫 निष्कर्ष

गोधना पूजा केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय समाज की लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत उदाहरण है। आज के आधुनिक युग में भी, यह पूजा हमारी जड़ों से जुड़े रहने और अपने संस्कारों को याद रखने का सुंदर माध्यम है।

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